Thursday, June 16, 2011
Introduction
पता : अखाडाघाट रोड, कृष्णा सिनेमा के सामने, मुजफ्फरपुर
जिला / प्रान्त : मुजफ्फरपुर, बिहार
फ़ोन / मोबाइल नं. : 09431238161
व्यवसाय : ऑफिस उपयोग के इलेट्रोनिक्स और वाटर प्युरिफायर
शाखा : मुजफ्फरपुर
मंच में जुड़ने का वर्ष : 1996 - 1997
मंच में अब तक का सर्वोच्च पद : शाखा अध्यक्ष
मंच में अभी की स्थिति : निवर्तमान शाखा अध्यक्ष
आपका मंच के साथ कोई विशिष्ठ अनुभव :
*अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच द्वारा प्रायोजित कन्या भ्रूण संरक्षण अभियान में अब तक पूर्णरूपेण सहभागिता,
*विभिन्न विषयों पर विचार गोष्ठी,
*कैरियर काउन्सलिंग - 2007 (शाखा मंत्री),
*विशिष्ट मेधा सम्मान की शुरुआत - 2007 (शाखा मंत्री),
*मनोरंजन मेला की पुनः शुरुआत - 2007 (शाखा मंत्री),
*सांस्कृतिक पहचान हेतु शारदीय नवरात्रों में "गरबा री रात - डंडिया उत्सव" की शुरुआत - 2008 (शाखा मंत्री),
*राजनैतिक चेतना हेतु समाज में वोट देने हेतु जागरूकता अभियान - 2009 (शाखा अध्यक्ष),
*किसी भी सरकारी / गैरसरकारी सहायता से भी पहले शहर से दूर बसे अग्नि पीड़ित गांवों का दौरा कर राहत सामग्री का वितरण - 2009 (शाखा अध्यक्ष),
*शाखा का नया कार्यालय - 2009 (शाखा अध्यक्ष),
*सुदूर क्षेत्रों में जाकर छोटे बच्चों के बीच जाकर शिक्षण सामग्री का वितरण - 2010 (शाखा अध्यक्ष),
*शाखा मुखपत्र - "मायुम सन्देश" के त्रैमासिक प्रकाशन की शुरुआत - 2010 (शाखा अध्यक्ष),
*सामूहिक रक्तदान शिविरों की शुरुआत - 2010 (शाखा अध्यक्ष),
*व्यक्तित्व विकास हेतु कार्यशाला का आयोजन - 2010 (शाखा अध्यक्ष),
*पत्रकारिता सम्मान समारोह - 2010 (शाखा अध्यक्ष),
*मुजफ्फरपुर आगमन पर ज्ञान ज्योति यात्रा का भव्य स्वागत - 2010 (शाखा अध्यक्ष),
*कड़ाके की ठण्ड में रात्रि भ्रमण कर जरुरतमंदों को कम्बल वितरण - 2010 एवं 2011 (शाखा अध्यक्ष),
*2 स्थाई अमृत धारा (प्याऊ) का निर्माण (1 शीतल जल) - 2010 (शाखा अध्यक्ष),
*पितामह महाराजा अग्रसेन जी की जयंती पर वृक्षारोपण की शुरुआत - 2011 (शाखा अध्यक्ष),
**पोलियो करेक्टिव सर्जरी सह कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर - 2011 (शाखा अध्यक्ष),
*बिहार दिवस समारोह - 2011 (शाखा अध्यक्ष),
*इसके अतिरिक्त शाखा के अन्य स्थाई एवं धार्मिक कार्यक्रम (विशेष उल्लेखनीय कांवरिया सेवा शिविर, ईशर-गणगोर तीज महोत्सव, एम्बुलेंस, ओक्सीजन सेवा, स्वास्थ्य जाँच शिविर सामूहिक विवाह, आदि), प्रान्त के सभी कार्यक्रम (विशेष उल्लेखनीय सामाजिक चेतना महाकुम्भ एवं समय समय पर आयोजित प्रांतीय सभा और अधिवेशन, आदि), राष्ट्र द्वारा प्रायोजित सभी कार्यक्रम (विशेष उल्लेखनीय युवा विकास कार्यक्रम, भाग्यशाली दानपत्रों का शाखा ध्येय पूर्ण, राष्ट्रीय अधिवेशन, आदि) में पूर्ण सक्रिय सहभागिता.
किसी अन्य संस्था जिससे से जुड़े हों :
*आदर्श विद्या मंदिर (समाज द्वारा संचालित कक्षा 5 से 10 तक CBSE आधारित कन्या उच्च विद्यालय) - कोर कमिटी सदस्य
*मुजफ्फरपुर गौशाला - कार्यकारिणी सदस्य
*बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मलेन - आजीवन सदस्य
*श्री राणीसती मंदिर - आजीवन सदस्य
*मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल
सहित समाज की सभी संस्थाओं से जुडाव
कोई विशेष कार्यक्रम जिसमे आपकी रूचि अधिक है : व्यक्तित्व विकास हेतु मंच आन्दोलन की अविरल यात्रा में दोतरफ़ा संवाद की शुरुआत का प्रयास, ये ग्रुप उसी प्रयास का एक अंग.
Tuesday, May 17, 2011
Saturday, December 4, 2010
Nar Seva - Narayan Seva
का आयोजन करने जा रहा है l यह शिविर अब तक हजारो विकलांगो का सफल ऑपरेशन कर चुके देश के प्रख्यात चिकित्सक विशाखापत्तनम के डॉ.एस.भी.आदिनारायण राव एवं उनकी कुशल चिकित्सकों की टीम, द्वारा होना निश्चित हुआ है l इस शिविर के दौरान रोगियों एवं उनके एक सहयोगी के रहने एवं भोजन की भी निःशुल्क व्यवस्था है l
जरा सोचिये; यदि हम एक नन्हे से बच्चे को जिनके हाथ - पैर पोलियो या अन्य कारण से टेढ़े-मेढे हो गए हो, वे ठीक से चल-फिर नहीं पा रहे हों, को देखते हैं तो आँखें भर आती हैं l ऐसी ह्रदय विदारक स्थिति न रहे इसके लिए यह एक छोटी सी पहल की गयी है, ताकि इन असहायों का ऑपरेशन कर उन्हें आत्मनिर्भर बना सकें एवं वे समाज की मुख्यधारा में चल सकें l
किसी भी प्रकार के सहयोग के लिए आप कार्यक्रम कार्यकारिणी से संपर्क कर सकते हैं अथवा सीधे ही "सेन्ट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया", साहू पोखर शाखा, मुजफ्फरपुर स्थित "मारवाड़ी युवा मंच, मुजफ्फरपुर" के खाता सं०3093642620 में सीधे जमा करवा सकते हैं, कृपया ऐसी स्थिति में हमें सूचित अवश्य करें, ताकि आपके सहयोग को उचित सम्मान दिया जा सके l
Sumit Chamria
Br.President
Marwari Yuva Manch, Muzaffarpur
Mob.: +91-9431238161
Email: sumitchamria@gmail.com
Thursday, November 25, 2010
Upcoming Moov India Camps - Through out Nation
ALL INDIA MARWARI YUVA MANCH
3432/13,
UPCOMING ARTIFICIAL LIMBS AND CALIPERS FITMENT CAMPS
UDHAMPUR (JAMMU & KASHMIR) – 23rd - 25th NOV 2010
TINSUKHIA (ASSAM) - 15th - 18th DEC 2010
JAMSHEDPUR (JHARKHAND) - 18Th - 20th DEC 2010
BAREILLY (UTTAR PRADESH) - 24th - 26th DEC 2010
LAKHIMPUR KHIRI (UTTAR PRADESH) - 1st - 3rd JAN 2011
JAISALMER (RAJASTHAN) - 7th - 9th JAN 2011
UPCOMING FREE POLIO CORRECTIVE SURGERY CAMP
MUZAFFARPUR (BIHAR) - 5th – 6th JAN 2011
For details related to the Free polio corrective surgery , please contact
Programme Office:
Dr.Ramesh Kumar Kejriwal (Adv.)
Phone: 0621-2245929
email: meramayum@gmail.com
webpage: www.meramayum.blogspot.com
Sri Sumit Chamria
(Br.President - Marwari Yuva Manch, Muzaffarpur)
Health Line
Road Opp.Krishna Cinema,
Muzaffarpur - 842001.
Contact.- 0621-2225363
Mob.- 9431238161,9334070958
email: sumitchamria@gmail.com
-: Surgeries will be done by :-
Dr. S.V.Adinarayan Rao & Team, Vishakhapattnam
Sunday, November 21, 2010
Polio Corrective Surgery - 5 Jan.2011


All India Marwari Yuva Manch is one of the largest volunteer organizations in
The main aim of the MANCH is to organize the youth force and prepare them to contribute to the progress of the community as well as of the Nation. It makes youths conscious about their social obligations so that the dignity of the community is maintained. Manch gives ample opportunity to the youths who may give leadership in any sector. It is, therefore, the fundamental desire of the MARWARI YUVA MANCH that the youth force be organize to become duty bound for all round development of the Nation at Social, Physical as well as Moral level along with that of the Community.
It has branches spread all over India and as of today it has around 610 branches.
In last 3 decades MYM has done remarkable job in delivering social services, a few of their projects are highlighted below:
1. Calipers and Artificial Limbs – 47000 limbs provided
2. Ambulance Services – 213 free ambulances are running round the clock
3. Movement to protect girl child – Intensive campaign in interiors of Rajasthan and all over India
4. Pure and hygienic water project “Amrit dhara” – 2500 coolers and pyaus under the banner of National Marwari Foundation (NMF), All India Marwari Yuva Manch has adopted a mission to make India disable free.
MYM has provided 47000 artificial limbs throughout country under the movement “Move India”. Most of the disabled persons in India are living isolated life and are poor. The disability combined with poverty and lack of education denies access to rehabilitation services. The AIMYM emphasis on enhancing the accessibility of assistive devices and rehabilitation aids to people with disabilities. The AIMYM evolved an appropriate, simple, informal and humane delivery system "THE CAMP APPROACH", under which artificial limbs, calipers and other appliances are provided easily and free of cost at the camp site. The AIMYM organizes a large number of camps every year in various parts of the country, where artificial limbs (Jaipur Prostheses), polio calipers etc. are fabricated and provided on the spot.
Viklangta Unmulan Karyakram
With The thought of “Viklangta Vihin Desh Hamara” we are organizing a camp on 5th of January 2011, for the poor, needy and helpless people of the society who are physically challenged, at Muzaffarpur (the center place of North Bihar) to operate them free of cost and made them stand on their own legs and work with there own hands. We’ll also help them through medicine and accommodation during the treatment / surgery along with the food (free of cost) for the patient and their attendant. For these selfless services of our organization we request your honor to donate with free hands.
As the Munch is a non-profit service oriented voluntary organization its each and every service are totally free and for the benefit of needy and the suffering humans. The Manch sustains on donations from public, charitable organization and the grants from government. In a way, all the achievements & humanitarian services of the Manch are only possible you’re your help.
We, in the interest of the disabled and needy human being, request you all to come forward with a generous hand to support us with liberal donation.
Scheme of Donation | |
You may sponser multiple operations. |
I would really appreciate your support in this noble cause and hope for a positive response.
Thanks & Regards,
Sumit Chamria
Br.President, Marwari Yuva Manch, Muzaffarpur
Mob.: +91-9431238161
Email: sumitchamria@gmail.com
Note : Please circulate this mail to every one in your mailbox.
Wednesday, August 11, 2010
सुखा और बाढ़
Sunday, June 27, 2010
एक अनोखा विवाह....
Saturday, June 26, 2010
स्वामी विवेकानंद का शिकागो की धर्म सभा में दिया गया भाषण
मित्रों, आज कुछ लिखने बैठा तो मेरे सामने स्वामी विवेकानंद का शिकागो की धर्म सभा मे 11 सितम्बर 1893 को दिया गया भाषण आ गया, तो सोचा किइसके कुछ मुख्य अंश को आप सबके साथ क्यों न बाटा जाय.......................
प्रस्तुत है ...........
अमेरिकी निवासी बहनों और भाइयों
जिस अपनत्व और प्यार के साथ आपने हम लोगो का स्वागत किया है, उसके फलस्वरूप मेरा ह्रदय अकथनीय हर्ष से प्रफुल्लित हो रहा है। संसार के प्राचीन ऋषिओं के नाम पर मै आपको धन्यवाद देता हूँ । तथा सब धर्मों की मतास्वरूपहिंदू धर्म के करोड़ों हिन्दुओं की ओर से भी धन्यवाद प्रकट करता हूँ।
मै उन सज्जनों के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ,जिन्होंने इस सभामंच से पूर्व से आए प्रतिनिधियों के बारे मे ये बतलाया है कि, ये दूर देश वाले पुरूष भी सर्वत्र सहिष्णुता का भाव प्रसारित करने के निमित्त यश व गौरव के अधिकारी हो सकते है।
मुझको ऐसे धर्मावलम्बी होने का गौरव है,जिसने संसार को सहिष्णुता तथा सब धर्मो को मान्यता प्रदान करने की शिक्षा दी। हम लोग सब धर्मों के प्रति सहिष्णुता ही नही रखते वरन सब धर्मों की सच्ची बातो को ग्रहण भी करते हैं। मुझे आपसे यह कहते हुए गर्व होता है की मेरे धर्म की पवित्र भाषा संस्कृत मे अंग्रेजी शब्द एक्स्क्लुसन का कोई पर्यायवाची नही है। मुझे एक ऐसे देश का व्यक्ति होने का अभिमान है ,जिसने प्रथ्वी की समस्त पीड़ित शरणागत जातियों को तथा विभिन्न धर्मों के बहिष्कृत मतावलंबियों को आश्रय दिया है। मुझे यह बतलाते गर्व होता है कि, जिस वर्ष यहूदियों का पवित्र मन्दिर रोमन जाति के अत्याचार से धूल में मिला दिया गया,उस समय लाखों यहूदी शरण लेने दक्षिन भारत पहुंचे,और हमारी जाति ने उन्हें छाती से लगाकर शरण दी। ऐसे धर्म में जन्म लेने का मुझे गर्व है,जिसने इस्लाम की आंधी में उजड़ी पारसी जाति की रक्क्षा की और आज तक कर रहा है। ---------------------------साम्प्रदायिकता ,संकीर्णता और इनसे उत्पन्न भयंकर धर्म-विषयक उन्मत्ता इस सुंदर धरती पर बहुत समय तक राज्य कर चुके है। इनके घोर अत्याचार से प्रथ्वी भर गई इन्होने अनेक बार इस धरती को माने रक्त से सींचा,सभ्यताएं नष्ट कर दालिताथा समस्त जातियों को हताश कर डाला । अगर यह न होता तो मानव समाज आज कहीं अधिक उन्नत होता। पर अब उसका भी समय आ गया है,और मे आशा करता हूँ की जो घंटे आज सुबह इस सभा के सम्मान मै बजाये गए हैं,वे समस्त कट्टरताओं,तलवार के बल पर किए जाने वाले समस्त अत्याचारों की पारस्परिक कटुताओं के लिए म्रत्यु-नाद ही सिद्ध होंगे।
और इस दिन के बाद स्वामीजी के भाषणों की लगातार १७ दिवस तक चले विश्व धर्म सम्मलेन मै सबसे अधिक मांग होने लगी,तथा विश्व की नजरों मे दबे कुचले हिंदू धर्म व संस्कृति को विश्व के सबसे महान धर्म सबसे महान संस्कृति माना जाने लगा।
Friday, June 11, 2010
मारवाड़ी: धर्म, जाती, क्षेत्र या संस्कृति ? भाग - 2
प्रिय साथियों,सप्रेम जय सियाराम !हम सब मारवाड़ी हैं, ये बात सर्वविदित है, परन्तु कैसे...? राजस्थान में रहने वाले जो मारवाड़ी हैं, वो राजस्थानी हैं, हरियाणा में रहने वाले हरियाणवी और हम जैसे जो मारवाड़ी हैं, जिनके पुरखे 2-3 पीढ़ियों पहले राजस्थान, हरियाणा, मालवा आदि क्षेत्रों से आकर देश-दुनिया में बसे. आगे जाकर बिहारी, महाराशट्रीयन, गुजरती, अमेरिकी, नेपाली आदि बने. हम मारवाड़ी किसी एक क्षेत्र विशेष में तो रहते नहीं, पूरी दुनिया में फैले हुए हैं और जहाँ भी गए हैं वहां के लोगों, भाषा एवं रीती-रिवाजों को खुले दिल से अपनाया भी है. आज हमारी संख्या लगभग 9 करोड़ (एक अनुमान) है. अब यदि जाती की बात करें तो हम किसी विशेष जाती से बंधे हुए भी नहीं, अग्रवाल, ब्राह्मन, स्वर्णकार, राजपूत, पिछड़ी जाती, महेश्वरी, जाट आदि सभी जातियां हमारे यहाँ हैं. कर्म के आधार पर देखें तो हमारे लोग व्यापार, राजनीती, प्रसाशन, सरकारी नौकरियों आदि तमाम क्षेत्रों में भरे हुए हैं. धार्मिक दृष्टि से देखा जाये तो, मारवाड़ियों में हिन्दू, जैन, बौद्ध, मुस्लिम आदि सभी धर्मों को मानने वाले लोग हैं. फिर ऐसा क्या है जो हम सबसे अलग हैं और वो कौन सा तार है जो हमें एक धागे में पिरोये हुए है, वो है हमारी संस्कृति, हमारी सभ्यता हमारी अनूठी विचारधारा.
इसी से सम्बंधित है ये परिचर्चा जिसका विषय है: मारवाड़ी: धर्म, जाती, क्षेत्र या संस्कृति
दोस्तों; इस परिचर्चा में भाग लेने के लिए आप सभी सादर आमंत्रित हैं. आपके द्वारा भेजी गयी प्रविष्टीयां समाज को नए रूप में परिभाषित करेगी.
- आपका ही....सुमित चमडिया
Saturday, June 5, 2010
हंसगुल्ले....
"जिस काम को अमरीका को करने में बरसों मेहनत करनी पड़ी, ये दोनों आदमी बिना किसी रॉकेट के यहाँ हमसे पहले कैसे पहुँच गए"? यह सोचता हुआ नील आर्मस्ट्रॉन्ग उनके पास गया और उनसे पूछा, "भाईसाहब आप लोग कौन हैं, जो हमसे पहले यहाँ पहुँच गए"?
उनमें से एक आदमी ने उत्तर दिया, "कैमरामेन संतोष के साथ दीपक चौरसिया.....स्टार न्यूज ब्यूरो"।
Tuesday, May 25, 2010
मारवाड़ी: धर्म, जाती, क्षेत्र या संस्कृति ?
मारवाड़ी: धर्म, जाती, क्षेत्र या संस्कृति ?
आप अपने विचार यहाँ पोस्ट करें और साथ ही साथ उस विचार का आधार भी अवश्य लिखें.
धन्यवाद.
Monday, April 19, 2010
Thursday, April 1, 2010
समाज सुधार कि दिशा में एक अति आवश्यक कदम...
अति आवश्यक कुछ बातों कि ओर आपका ध्यान आक्रिस्ट करना चाहूँगा. बदलते समय में समाज का स्वरुप बदला है, तो कुछ व्यवहारों का स्वरुप भी अप्रासंगिक या अवय्व्हारिक हो गया है. आज के समय के अनुसार इनपर विचार करना काफी जरुरी है. इनकी वजह से समाज में आपसी जुराव और बढेगा और कुछ कुरीतियाँ भी समाप्त होंगी.
1. मिलनी (पुरुषों कि - 4/- रूपये निर्धारित है और ये कब चांदी के हो गए कुछ पता ही न चला, एवं महिलाओं कि - असीमित, इस वजह से समाज का एक बड़ा तबका अत्यंत दबाव महसूस करता है.)
2. पगालाग्नी (महिलाओं के द्वारा अपने से वरिस्ट महिलाओं कों पैर छू कर दी जाने वाली कुछ नगद राशी, आज के दौर में पूर्णतया अप्रासंगिक).
3. कन्या जन्म पर होने वाले उत्सव (आज भी इसका प्रचलन काफी कम या प्रायः नहीं ही है).
उपरोक्त तीनो ही बातें आज कि तारीख में चिंतनीय है. इनके स्वरुप कों बदलने के लिए मेरे कुछ सुझाव अधोलिखित हैं:
1. मिलनी - पुरुषों कि 10/- रूपये निर्धारित कि जाये, और महिलाओं कि 50/- रूपये, कागज के.
2. पगालाग्नी - पूर्णतया बंद कि जानी चाहिए, बुजुर्ग महिलायों कों सम्मान चाहिए ना कि धन.
3. कन्या जन्म कों प्रोत्साहित करने के लिए उनके जन्म पर उत्सव का आयोजन किया जाना एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित होगा.
उपरोक्त सभी बातें आपके विचार हेतु प्रस्तुत है, अपने महत्वपूर्ण विचार अवश्य देंगे.इस विषय पर मंथन के उपरांत ये सुझाव उचित मंच से सम्मलेन कों भी प्रेषित किये जाने चाहिए.
- सुमित चमडियामुजफ्फरपुर, बिहार+91-9431238161
अति आवश्यक कुछ बातों कि ओर आपका ध्यान आक्रिस्ट करना चाहूँगा. बदलते समय में समाज का स्वरुप बदला है, तो कुछ व्यवहारों का स्वरुप भी अप्रासंगिक या अवय्व्हारिक हो गया है. आज के समय के अनुसार इनपर विचार करना काफी जरुरी है. इनकी वजह से समाज में आपसी जुराव और बढेगा और कुछ कुरीतियाँ भी समाप्त होंगी.
Saturday, January 24, 2009
हमारे अभिभावक सदस्य
आज यह एक प्रासंगिक प्रश्न है. हमारे अन्दर की उर्जा को एक दिशा की आवश्यकता है जो अनुभव से ही मिल सकती है और अनुभव हमारे इन अभिभावक सदस्यों के पास है, जो हम उनसे प्राप्त कर सकते हैं।उनका सहयोग पाने के लिए हमें कई कदम उठाने होंगे
१. उचित सम्मान देना होगा।
२. उनका लगातार साथ पाने के लिए हम एक संरक्षक मंडल का गठन कर सकते हैं, इस मंडल का काम कठिन परिस्थिति में शाखा को अपने अनुभव से मार्गदर्शन देना होगा और समाज की वरिष्ठ संस्थाओं और युवा मंच के बिच सामंजस्य स्थापित करना होगा.कई और कदम हैं जिनकी चर्चा हम आगे करेंगे.
-सुमित चमडिया
मुजफ्फरपुर
9431238161
Saturday, January 17, 2009
मैं मारवाडी हूँ !!!
श्री भवंत अग्रवाल और श्री राजेश जैन ने एक बड़ा ही महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया है, वास्तव में हमारी उम्र के युवाओं में इस प्रकार की भ्रांतियां हुई हैं, जिनका समाधान आवश्यक है. मैं स्वयं भी भ्रम की स्थिति में था की मै तो शेखावाटी (राजस्थान) का हूँ और महाराजा अग्रशेन जी का वंशज हूँ, इस नाते अग्रवाल हूँ और राजस्थानी हूँ पर मारवाडी....? आखिर जानकारियां इकट्ठी करने की कोशिश की और जो पाया उसे यहाँ आपसे बाँटना चाहता हूँ;
हमारे पूर्वज बेहतर जीवन और रोजगार की तलाश की में शताब्दियों पूर्व राजस्थान, हरियाणा से निकल कर देश-विदेश में स्थानांतरित हुए, इनमे सबसे पहले निकलने वाले मारवाड़ (राजस्थान का एक क्षेत्र) के लोग थे, जो अपनी कर्मठता, कार्य और व्यवहार कुशलता, विपरीत परिस्थियों में भी सामान्य जीवन यापन की कला और गजब की व्यापारिक निति एवं विश्वसनीयता के कारण काफी प्रचलित हुए. इनकी वेश-भूषा, भाषा और खान - पान भी विशेष आकर्षण का केन्द्र होते थे. इनका एक और विशेष गुण ये था की ये जहाँ भी ये रहते थे वहाँ के स्थानीय लोगों के दुःख-दर्द को अपना समझते थे. अपने इन्ही गुणों के चलते ये लोग अपना सिक्का ज़माने में सफल हुए और चूँकि इनमे अधिकांश मारवाड़ से आए थे इसलिए मारवाडी कहलाये. बाद में इनलोगों ने अपने व्यापार या अन्य कार्यों में सहयोग के लिए अपने ईष्ट - मित्रों, रिश्तेदारों परिचितों को बुलाना शुरू कर दिया, जो पुरे राजस्थान या समीपवर्ती इलाकों (अब के राजस्थान, हरियाणा और मालवा आदि) के थे. आपसी समानता (गुणों और व्यव्हार में) और समन्वय के कारण ये लोग भी मारवाडी कहलाये जाने लगे. आज विश्व में ऐसे लगभग 9 करोड़ (एक अनुमान) मारवाडी हैं, जो अपने - अपने क्षेत्रों में अव्वल हैं और आज भी अपने प्रारंभिक गुणों, कर्मठता, कार्य और व्यवहार कुशलता, विपरीत परिस्थियों में भी सामान्य जीवन यापन की कला व्यापारिक निति एवं विश्वसनीयता के साथ परोपकार की भावना को अपनाए हुए हैं. ये लोग सिर्फ़ मारवाडी हैं ना की ब्राह्मण, क्षत्रिय, अग्रवाल या कुछ और, ना ही ये किसी क्षेत्र विशेष के कहे जाते हैं।
मुझे पूरी उम्मीद है की इस लेख से आपकी जिज्ञाषा शांत होगी.
(नोट - इस सन्दर्भ का एक महत्वपूर्ण शोध ग्रन्थ डॉ.श्री टी.के.टकनैत द्वारा रचित "मारवाडी समाज" है, जिसका अध्ययन करके और भी सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है)
- सुमित चमडिया
मुजफ्फरपुर
9431238161
Tuesday, January 13, 2009
ये रेडियो मायूम है...!!!
साथियों गत 8 जनवरी 2009 अपने अनुभवों को बांटने के उद्धेस्य से एक प्रश्न मंच गठित करने का प्रयास किया गया था। आपका कोटिशः धन्यवाद की आपने उसपर भरपूर स्नेह दिया है और अपने बहुमूल्य विचारों से ब्लॉग के सदस्यों को अवगत करवाया। यहाँ आपके सभी विचारों को एक साथ करने का प्रयास कर रहा हूँ।
पूछे गए प्रश्न थे :-
प्रश्न 1 - हम क्या करें की समाज के बेहतर लोग स्वतः मंच की सदस्यता लेने की ओर आकर्षित हों ?
(8 जनवरी 2009 को सुमित चमडिया द्वारा)
इस प्रश्न के उत्तर में हमें अब तक कई जवाब प्राप्त हुए हैं; जिनका सार-संक्षेप है;
(उत्तरदाता - सर्वश्री ओमप्रकाश अगरवाला, अमित गोयल, अनिल वर्मा, प्रमोद कु।जैन, निश्चल सिंघल एवं शम्भू चौधरी)
1। शाखा स्तर पर ऐसे लोगो की सूचि बना कर उनसे संपर्क करना अवाम मंच के अखिल भारतीय स्वरुप के बारे में उन्हें अवगत करना.
2। कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित करना.
3। कार्यक्रमों और सभाओं में समयानुवार्तिता का ध्यान रखा जाए एवं लंबे भाषणों से बचा जाए.
4। मंच के नए और कर्मठ कार्यकर्ताओं को सब के सामने पुरस्कृत किया जाए, ताकि उनमे नए उत्साह का संचार हो. विभिन्न कार्यक्रमों में अपने शाखा के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं कार्यक्रम संयोजकों को जरुर पुरस्कृत करें.
5। मंच नेतृत्व कार्यक्रम की विफलता पर किसी पर दोषारोपण न कर स्वयं नैतिक जिम्मेवारी ले और कार्यकर्ताओं में उत्साह वर्धन करने का प्रयास कर उन्हें ये विश्वास दिलाये की अगला कार्यक्रम सफल होगा.
6। अतिथियों को मंच पर लाना, उनका सम्मान करना, कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं को अधिक से अधिक शामिल करना चाहिए.
7। मंच दर्शन का समाज में विस्तार करना होगा, हम अभी भी केन्द्रित पैठ बना पाए हैं और जब तक इसका विकेन्द्रीकरण नही होगा तब लोग स्वतः ही मंच कि सदस्यता लेने के लिए आकर्षित नही हो सकते हैं .
8। मंच के सभी सदस्य एक श्रेणी और एक ही नजरों से देखें जाने चाहिये.
(प्रश्न-1 हेतु आपके विचार \ अनुभव इस कृपया यहाँ पोस्ट करें)
Tuesday, January 6, 2009
रांची अधिवेशन में बहुत सारी बातों के बीच एक अच्छी चीज प्रख्यात अभिनेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री शत्रुघ्न सिन्हा का भाषण भी है, अपने भाषण में बहुत सी राजनैतिक बातों के आलावा उन्होंने कुछ ग्रहण करने योग्य बातें भी कही, जिसमे से एक भाषा प्रेम पर उनके विचार हैं। उन्ही के शब्दों में ;
भाषा तीन तरह की होती है, और तीनो ही व्यक्ति के लिए आवश्यक है
- मातृभाषा - संस्कार के लिए ,
- राष्ट्रभाषा - व्यवहार के लिए, एवं
- विदेशी भाषा - व्यापार के लिए
उपरोक्त दो और तीन तो हम हर जगह प्रयोग कर ही रहे हैं, और पहली का प्रयोग घर में. यदि ब्लॉग के लेखकों का मन बने तो यहाँ एक नया प्रयोग किया जा सकता है. "आज का विचार" के नाम से लिंक बना कर उसमे प्रतिदिन एक पोस्ट (छोटा या बड़ा, दोहा- कविता, बुजुर्गों के विचार जैसा कुछ भी) डाला जाए जो हमारी मातृभाषा में हो और विभिन्न लेखकों द्वारा डाला जाए।
सधन्यवाद
-सुमित चमडिया
मुजफ्फरपुर
मोबाइल - 9431238161
Saturday, January 3, 2009
मंच के दीवाने और दो तरफा संवाद...
हेलो... सुमित, कहाँ हो? मैं ट्रेड - एक्स के बाहर हूँ, वहीँ आ जाओ.
फिर तो ये सिलसिला ही चल पड़ा, कभी ओमप्रकाश जी, रवि जी तो कभी निश्चल जी, कभी अमित गोयल, रमेश जी, भवंत और महेश जी कितनो का नाम लिखा जाये... इसके बाद शुरू हुआ परिचय का दौर आप हैं शम्भू चौधरी, आप विनोद रिंगानिया, विकाश जी और लोग जुरते ही चले गए.... कभी इनसे मिले नहीं, कभी देखा नहीं, न आवाज सुनी (अधिकतर की), एक चीज जो सब में थी- मंच की दीवानगी, हाँ बस इन्टरनेट पर मुलाकात हुआ करती है, ऐसा लगता था की हम अरसे से एक दुसरे को जानते हैं, एक दुसरे के साथ ही रहते आये हैं. ये आनंद का अतीरेक था. एक जीता - जगता उदाहरण था संवाद के दो तरफा होने का.
क्या कहा; दो तरफा संवाद...?
ये क्या होता है.... संवाद तो संवाद है, फिर ये दो तरफा....?
आज सारे विश्व में संचार क्रांति आ चुकी है, तो मंच और वृहत तौर पर समाज इससे अछूता कैसे रह सकता है और मारवाडी समाज हमेशा इसलिए अग्रसर रहा है क्योंकि इसने आगे बढ़कर परिवर्तन को स्वीकार किया है। जी हाँ.. समाचार पत्र, डाक, कूरियर, टेलीफोन, मोबाइल, एस।एम।एस., इन्टरनेट हाँ और अब ये ब्लॉग. अरे ये क्या बातों - बातों में ये पता ही नहीं चला की आप भी तो दो तरफा संवाद को स्वीकार कर चुके हैं तभी तो आप इस ब्लॉग पर हैं और मेरी इस बात के बाद अपना विचार भी रख सकते हैं, यानि मेरी बात आप तक पहुंची और आप सबकी बात मुझ तक, हमेशा सेकेंडों में...
जारी....
सुमित चमडिया
मुजफ्फरपुर
9431238161
Friday, January 2, 2009
मंच का कारवां और हम युवा साथी...
-सुमित चमडिया
मुजफ्फरपुर
9431238161
क्या कहते हैं मंच के सितारे
ग्रह दशा - मारवाडी युवा मंच एवं श्री जीतेन्द्र गुप्ता
श्री गुप्ता वर्तमान में ऑटोमोबाइल के व्यवसाय से जुड़े हैं और उत्कल प्रदेश में बहुचर्चित हस्ती बन कर पिछले दिनों अखिल भारतीय मारवाडी युवा मंच के नवम राष्ट्रीय अधिवेशन (कारवां - 2008) में मंच के सर्वोच्च पद राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में 28 दिसम्बर 2008 को शपथ ग्रहण किये हैं। इनके ज्योतिषीय सितारे परिलक्षित कराते हैं की जिस प्रकार पूर्व के वर्षों में उत्कल प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष के रूप में इन्होने 58 शाखा से 120 के करीब शाखाओं का विस्तारीकरण कर मंच को बुलंदी प्रदान की है उसी प्रकार मंच के रजत जयंती वर्ष (20 जनवरी 2009 - 2010) में इनके नेतृत्व में मंच परिवार के पांचों स्तम्भ जनसेवा, समाज सुधार, व्यक्ति विकाश, सामाजिक सम्मान एवं आत्म सुरक्षा, राष्ट्रीय विकाश एवं एकता को एक अच्छी दिशा मिलेगी। वहीँ विशेष रूप से इस वर्ष में सामाजिक सम्मान एवं आत्म सुरक्षा और जनसेवा जैसे क्षेत्रों में अधिक कार्य होंगे, ऐसा सितारे परिलक्षित करते हैं।वहीँ इनके सितारे यह भी कहते हैं की इन्हें अपने व्यवसाय पर विशेष दृष्टि रखनी चाहिए और अपनी सफल व्यवसायी एवं समाजसेवी की प्रतिष्ठापित छवि कायम रखने हेतु नित्य हनुमान आराधना तथा प्रत्येक पूर्णिमा को चन्द्र दर्शन के बाद रात्रि में " ॐ नमो नारायणाय " के मंत्र का जाप 15 मिनट तक करना चाहिए, इससे इनके सभी कार्य सिद्ध हो सकेंगे.वैसे मंच के स्थापना दिवस 20 जनवरी 1985 और श्री जीतेन्द्र गुप्ता के राष्टीय अध्यक्ष पद पर शपथ ग्रहण दिवस 28 दिसम्बर 2008 के सितारों को देखने से यह लगता है की यह वर्ष काफी संघर्ष पूर्ण रहेगा, विभिन्न मुद्दों पर विरोधाभास के बावजूद भी ये अपनी और मंच की मजबूत छवि बनाने में वर्ष के मध्य तक सफलता की ओर बढ़ेंगे। अपने कार्यों से इनका Distinction Marks (75 %) पाना तय माना जा सकता है.
साभार:-आचार्य श्री विष्णु शर्मा (ज्योतिषी)
अध्यक्ष - ज्योतिष अनुसन्धान केंद्र, मुजफ्फरपुर
सदस्य - मारवाडी युवा मंच मुजफ्फरपुर
मोबाइल - ९८३५०६०१९९
जीतेन्द्र गुप्ता जी के जन्म और मंच के स्थापना का आधार लेते हुए इस फलदशा की गणना की गयी है।
-सुमित चमडिया
मुजफ्फरपुर
9431238161